“Child Labour Vidya Yojana: हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचाने की सरकारी पहल”

लेखक: Shelfy Naz
बाल श्रमिक विद्या योजना 8–18 आयु के कामकाजी बच्चों को पढ़ाई में लौटाने के लिए आर्थिक सहायता, ट्रैकिंग और प्रवेश सुविधा देती है।


परिचय एक नया मोड़ उन बच्चों की ज़िंदगी में

भारत में लाखों बच्चे परिवार की रोज़मर्रा की ज़रूरतों में मदद करते-करते पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। बाल श्रमिक विद्या योजना इन बच्चों को फिर से स्कूल तक पहुँचाने और उनकी आमदनी के नुकसान की भरपाई करने के लिए एक कंडीशनल कैश ट्रान्सफर पहल है। इसका उद्देश्य 8-18 आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों/किशोर-किशोरियों को स्थायी रूप से विद्यालय में शामिल कराना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना है।


योजना के उद्देश्य (Simple & Clear)

  • कामकाजी बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज में वापस जोड़ना।
  • परिवार की आर्थिक सहायता करते हुए बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दिलाना।
  • बच्चों के पुनः स्कूल में शामिल होने, उपस्थित रहने और उत्तीर्ण होने को प्रोत्साहित करना।
  • पात्र परिवारों को अन्य सरकारी सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना।

कौन-कौन लाभान्वित होंगे ? पात्रता और परिवार की क्षम्यता

योजना उन परिवारों को लक्षित करती है जहाँ:

  1. माता या पिता अथवा दोनों की मृत्यु हो चुकी हो।
  2. माता या पिता अथवा दोनों स्थायी रूप से विकलांग हों।
  3. परिवार की मुखिया महिला हो (पति की मृत्यु/तलाक आदि)।
  4. माता/पिता किसी गंभीर असाध्य रोग से ग्रस्त हों।
  5. भूमिहीन परिवार हों।

लाभार्थी वे 8-18 आयु वर्ग के कामकाजी बच्चे/किशोर-किशोरियाँ होंगे जो संगठित या असंगठित क्षेत्र में परिवार की आय के लिए श्रम कर रहे हैं जैसे खेत, गैर-कृषि, स्वरोज़गार, घरेलू काम आदि शामिल हैं।


प्राथमिकता की 9 श्रेणियाँ (सहज भाषा में)

योजना में लाभार्थियों की प्राथमिकता 9 श्रेणियों में बांटी गई है — जहाँ प्रथम श्रेणी सबसे उच्च प्राथमिकता है और नवम श्रेणी अपेक्षाकृत कम प्राथमिकता:

  1. प्रथम: दोनों माता-पिता की मृत्यु और बच्चे की आमदनी परिवार का मुख्य स्रोत।
  2. द्वितीय: पिता की मृत्यु और बच्चा परिवार का सहारा।
  3. तृतीय: माता-पिता दोनों स्थायी रूप से दिव्यांग।
  4. चतुर्थ: माता-पिता असाध्य रोग से ग्रस्त।
  5. पंचम: पिता स्थायी रूप से दिव्यांग।
  6. षष्टम्: पिता गम्भीर असाध्य रोग से ग्रस्त।
  7. सप्तम: परिवार की मुखिया महिला हो (पत्नी मृत/तलाकशुदा)।
  8. अष्टम: माता मृत/स्थायी दिव्यांग/गंभीर रोग।
  9. नवम: भूमिहीन परिवार जहाँ बच्चा काम करता हो।

नोट: हर लाभार्थी की पहचान निरीक्षण/सर्वेक्षण व प्रमाण-पत्रों के आधार पर की जाएगी।


आच्छादित जिले व लक्ष्य

जनगणना 2011 के आँकड़ों के आधार पर योजना के प्रथम चरण में 20 जिलों को चुना गया है — जैसे आगरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, बलिया, लखनऊ, बाराबंकी, बरेली, गाज़ियाबाद, गोरखपुर, मिर्जापुर व अन्य। हर जिले में लगभग 100 लाभार्थियों को कवर कर कुल 2000 बच्चों/किशोरियों को लक्ष्य बनाया गया है।


चयन प्रक्रिया (साफ और पारदर्शी)

  • प्राथमिक पहचान ग्राम पंचायत, स्थानीय निकाय, स्कूल प्रबन्धन समिति, चाइल्ड लाइन और स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा की जाएगी।
  • प्रमाण-पत्र (दिव्यांगता, मृत्यु, चिकित्सा प्रमाण) के आधार पर चयन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • श्रम विभाग के सर्वेक्षण व निरीक्षण से भी कामकाजी बच्चों की सूची तैयार होगी।
  • अंतिम स्वीकृति क्षेत्रीय अपर/उप/सहायक श्रम आयुक्त द्वारा दी जाएगी और लाभार्थी का डाटा ई-ट्रैकिंग सिस्टम पर अपलोड होगा।

आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन (कदम-दर-कदम)

  • मासिक अनुदान: बालकों के लिए ₹1000/माह, बालिकाओं के लिए ₹1200/माह। (सालाना ₹12,000 / ₹14,400)
  • शैक्षणिक प्रोत्साहन: कक्षा-8/9/10 उत्तीर्ण करने पर प्रत्येक कक्षा हेतु अतिरिक्त ₹6000 का प्रोत्साहन।
  • सभी भुगतान लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे किए जाएंगे।

ई-ट्रैकिंग, उपस्थिति और शर्तें

  • सभी लाभार्थियों का विवरण ऑनलाइन ई-ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज होगा (UNICEF के सहयोग से)।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए स्कूल में न्यूनतम 70% उपस्थिति अनिवार्य है, जिसका प्रमाण प्रधानाध्यापक ई-ट्रैकिंग में देंगे।
  • योजना में शामिल बच्चे अगर किसी कारण से राज्य के भीतर दूसरे जिले में स्थानांतरित होते हैं तो भी लाभ जारी रहेगा (Portability)।

शिकायत निवारण और निगरानी

  • शिकायतें जिलाधिकारी कार्यालय या ई-ट्रैकिंग पर दर्ज कराई जा सकती हैं।
  • जिलास्तरीय समिति एक महीने में शिकायत का निवारण सुनिश्चित करेगी।
  • योजना के क्रियान्वयन की मासिक व द्वि-मासिक समीक्षा क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर होगी।

अन्य सरकारी लाभों से जोड़ना

योजना का उद्देश्य केवल नकद सहायता नहीं, बल्कि परिवारों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना भी है जैसे विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, छात्रवृत्तियाँ आदि।


FAQs (सरल जवाब)

Q1. यह योजना किस उम्र के बच्चों के लिए है?
A: 8 से 18 वर्ष आयु के कामकाजी बच्चों/किशोरियों के लिए।

Q2. सहायता कितनी मिलती है?
A: बालकों को ₹1000/माह और बालिकाओं को ₹1200/माह।

Q3. उपस्थिति की क्या शर्त है?
A: विद्यालय में न्यूनतम 70% उपस्थिति अनिवार्य है।

Q4. आवेदन कैसे होगा?
A: पहचान स्थानीय ग्राम पंचायत/स्कूल/चाइल्डलाइन/श्रम विभाग द्वारा कराई जाएगी; अंतिम चयन श्रम अधिकारी करेंगे।

Q5. शिकायत कहां दर्ज करूं?
A: जिलाधिकारी कार्यालय या ई-ट्रैकिंग सिस्टम पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।


निष्कर्ष पढ़ाई से सबका भविष्य संवरता है

बाल श्रमिक विद्या योजना सिर्फ पैसों की मदद नहीं; यह बच्चों को विश्वास, शिक्षा और समाज में एक नया मुकाम देने की पहल है। जब हम कामकाजी बच्चों को पढ़ाई के रास्ते पर वापस लाते हैं, तो हम न सिर्फ उनकी ज़िंदगी बदलते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित करते हैं। आइए इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाएँ और उन बच्चों तक मदद पहुँचाएँ जिन्हें सबसे ज़्यादा जरूरत है।

✍️ लेखक: Shelfy Naz

अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक साइट लिंक पर जाएं:

https://www.bsvy.in/#:~:text=%20%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD(%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE):%2D%20%20(i)%20%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE,%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%AF%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%E0%A5%A4

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *